Urgent reminder for publishers: Final deadline approaching on March 31st to avoid losing titles and legal rights.
Nagpur: प्रेस रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया द्वारा जारी हालिया एडवाइजरी ने मीडिया और प्रकाशन क्षेत्र से जुड़े हजारों प्रकाशकों के लिए स्थिति को अत्यंत गंभीर बना दिया है। जिन शीर्षकों को पुराने प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स अधिनियम, 1867 के अंतर्गत सत्यापित किया गया था, लेकिन जिनका पंजीकरण अब तक पूर्ण नहीं हुआ, उनके लिए सरकार ने एक सीमित और अंतिम अवसर प्रदान किया है। यह अवसर केवल औपचारिक नहीं, बल्कि अधिकारों को सुरक्षित रखने की अंतिम प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।
सरकारी अभिलेखों के अनुसार, ऐसे लगभग 6033 शीर्षक हैं जिनकी सत्यापन प्रक्रिया तो पूर्ण हुई थी, किंतु दस्तावेजों में त्रुटियों, आवश्यक जानकारी के अभाव अथवा संबंधित प्रकाशकों की ओर से समय पर प्रतिक्रिया न मिलने के कारण पंजीकरण प्रक्रिया अधूरी रह गई। नए प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ पीरियोडिकल्स अधिनियम, 2023 के लागू होने के पश्चात इन मामलों को पुनः व्यवस्थित करने की आवश्यकता उत्पन्न हुई है।
इसी संदर्भ में सरकार ने एक बार के लिए तीन माह की समयावधि प्रदान की है, जिसके अंतर्गत संबंधित प्रकाशकों को प्रेस सेवा पोर्टल के माध्यम से अपनी लंबित प्रक्रिया पूर्ण करने का अवसर दिया गया है। यह स्पष्ट किया गया है कि संबंधित व्यक्ति या संस्था को 31 मार्च 2026 से पूर्व पोर्टल पर लॉगिन कर सभी कमियों को दूर करना, आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करना तथा लंबित उत्तरों को पूर्ण करना अनिवार्य है।
इस एडवाइजरी का स्वर स्पष्ट रूप से संकेत देता है कि यह केवल सुविधा नहीं, बल्कि एक अंतिम अवसर है। प्रशासनिक दृष्टि से यह समझना आवश्यक है कि सरकार ने पहले भी ऐसे मामलों में समय सीमा का विस्तार किया था, किंतु अपेक्षित अनुपालन न होने की स्थिति में अब कठोर रुख अपनाया जा रहा है।
यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर पंजीकरण प्रक्रिया पूर्ण नहीं की जाती, तो संबंधित शीर्षकों पर दावा समाप्त माना जा सकता है। ऐसे मामलों में यह संभावना प्रबल है कि शीर्षक सार्वजनिक उपयोग के लिए उपलब्ध कर दिए जाएं, जिससे कोई अन्य इच्छुक व्यक्ति या संस्था उस शीर्षक के लिए आवेदन कर सके। यह स्थिति पूर्व में भी उत्पन्न हो चुकी है, जहां अनुपालन न करने के कारण कई शीर्षक पुनः सार्वजनिक डोमेन में जारी किए गए थे।
विशेषज्ञों का मत है कि इस प्रकार की परिस्थितियों में केवल औपचारिकता के स्तर पर कार्य करना पर्याप्त नहीं होता। प्रत्येक दस्तावेज, प्रत्येक विवरण तथा प्रत्येक उत्तर का विधिवत परीक्षण आवश्यक है। छोटी-सी त्रुटि भी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है, जिसके परिणामस्वरूप आवेदन अपूर्ण माना जा सकता है।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि यह अवसर केवल उन मामलों तक सीमित है जिनमें पंजीकरण प्रक्रिया अभी तक पूर्ण नहीं हुई है। जिन शीर्षकों का पंजीकरण पहले ही संपन्न हो चुका है, वे इस प्रक्रिया से प्रभावित नहीं होंगे। अतः यह स्पष्ट रूप से लक्षित निर्देश है, जिसे अनदेखा करना गंभीर परिणाम उत्पन्न कर सकता है।
वर्तमान परिस्थितियों में यह अपेक्षित है कि संबंधित प्रकाशक इस विषय को प्राथमिकता दें और समय सीमा के भीतर सभी आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करें। प्रशासनिक प्रणाली में समय का विशेष महत्व होता है और निर्धारित अवधि के पश्चात किसी भी प्रकार की राहत या पुनर्विचार की संभावना अत्यंत सीमित होती है।
इस संदर्भ में यह कहना उपयुक्त होगा कि यह केवल एक सूचना नहीं, बल्कि एक निर्णायक चरण है, जहां प्रत्येक कदम सावधानीपूर्वक और समयबद्ध तरीके से उठाया जाना चाहिए।
समयसीमा निकट है और प्रक्रिया स्पष्ट है। अब निर्णय संबंधित व्यक्तियों के हाथ में है कि वे इस अवसर का उपयोग कर अपने अधिकार सुरक्षित रखते हैं या निष्क्रियता के कारण उन्हें स्थायी रूप से खो देते हैं।

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